Dance and Music

- नृत्य एवं संगीत – नृत्य संगीत वह संगीतमयी रचनात्मकता है, जो नृत्य की गतिशीलता, लय और अभिव्यक्तियों के साथ एक अभूतपूर्व संगति में साकार होती है। यह एक विशेष रूप से समन्वित रूप में प्रकट होता है, जिसमें संगीत के विविध राग, ताल, सुर और ध्वनियाँ नृत्य की अदभुत भंगिमाओं और गति के साथ अभिन्न रूप से एकाकार हो जाती हैं, परिणामस्वरूप एक अनुपम, काव्यात्मक एवं सम्वेदनात्मक संरचना का सृजन होता है। यह नृत्य की अभिव्यक्ति को एक दिव्य और उत्तेजक रूप में परिष्कृत करता है, जिसमें कलाकार की प्रदर्शन क्षमता का प्रत्येक आयाम एक अनूठे रूप में व्यक्त होता है। भारतीय संस्कृति के परम वैभव में नृत्य और संगीत का संगम, कालान्तर में एक अनिवार्य, अभिन्न और अमूल्य रचनात्मकता के रूप में विकसित हुआ है। शास्त्रीय भारतीय नृत्य शैलियाँ, जैसे कथक, भरतनाट्यम, ओडीसी, कुचिपुड़ी, कथकली आदि, इन दोनों रूपों के सहज समागम का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। प्रत्येक नृत्य शैली के भीतर एक विशिष्ट संगीत प्रणाली का अस्तित्व होता है, जो नृत्य के हर मोड़, हर रस और हर लय के साथ संलयित होकर उसे सम्पूर्ण रूप में प्रस्तुत करता है। इस समन्वित प्रयास में न केवल काव्यात्मकता का अनुभव होता है, बल्कि नृत्य और संगीत दोनों के बीच एक अद्वितीय सौन्दर्यात्मक सम्वाद भी स्थापित होता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में राग और ताल का निर्धारण नृत्य की भावनाओं और उसकी गतिशीलता के अनुरूप होता है, जिससे दोनों रूपों के बीच एक समृद्ध और शाश्वत सम्बन्ध बनता है ।
- वर्तमान परिवेश में किताबी ज्ञान के आलावे नृत्य एवं संगीत का ज्ञान आवश्यक हो गया है। कार्यो की व्यस्तता के चलते हमारे समाज का एक बड़ा भाग किसी न किसी प्रकार से दुखी रह रहा है। शोध से ज्ञात हुआ है कि नृत्य एवं संगीत के माध्यम से दुखी व्यक्तियों / मनोरोग से ग्रसित व्यक्तियों को भी ठीक किया जा सकता है। नृत्य और संगीत, केवल मनोरंजन के साधन न होकर, कलाकार के अंतरंग सम्वेदनाओं, विचारों और भावनाओं के अभिव्यक्तिमूलक रूपों के रूप में उद्भासित होते हैं। संगीत की लयबद्धता और स्वरगति, नृत्य के माध्यम से व्यक्त होती हुई, काव्यात्मकता के अव्यक्त रूप को शुद्ध रूप से प्रकट करती है। यह दोनों ही कला रूप भारतीय सभ्यता के अभिन्न अंग हैं,जो न केवल हमारे ऐतिहासिक सांस्कृतिक गौरव के संरक्षक, बल्कि उसे जीवित और समृद्ध रखते हुए समाज के विविध पहलुओं में उसकी निरन्तर उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले तंतु हैं। समय के साथ-साथ, यह अपनी प्रासंगिकता और जीवंतता को बनाए रखते हुए हमारी सांस्कृतिक जड़ों से स्थायी रूप से जुड़ा रहता है। नृत्य और संगीत शारीरिक लचीलापन, मानसिक संतुलन और शान्ति की संरचना में भी योगदान करते हैं। यह शारीरिक क्रियाओं के माध्यम से शरीर को लचीला और सुदृढ़ बनाता है, वहीं मानसिक शान्ति को प्राप्त कर, तनाव और अशान्ति का नाश करता है।
- भारतीय नृत्य और संगीत का धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक समारोहों में गहरा सन्दर्भ है, जहाँ यह आत्मा की गहराई में प्रवेश कर, आत्मिक उन्नति और शान्ति की ओर मार्गदर्शन करता है। जैसे कथक में भक्ति की पवित्रता है और भरतनाट्यम में देव पूजा के माध्यम से दिव्यता का संचार होता है। नृत्य और संगीत के द्वारा उत्पन्न प्रभाव दर्शकों के मानसिक और भावनात्मक स्तरों पर गहरी छाप छोड़ता है, जिससे उनके हृदय-मस्तिष्क में परिवर्तन होता है और वे आनन्द, आर्त्तता या चिन्तन की स्थिति में प्रवृत्त होते हैं। रागों और तालों की अपूर्व शक्ति दर्शकों की अंतर्निहित भावनाओं को जाग्रत कर देती है। नृत्य और संगीत सामूहिक आयोजन, उत्सवों और सामाजिक समारोहों में एकजुटता, सामूहिकता और साझा अनुभव के रूप में एक सक्रिय भूमिका निभाता है, जिससे यह समाज में सम्प्रेषण की भावना को जाग्रत करता है और विभिन्न जातीय और सांस्कृतिक समूहों को एकजुट करने का कार्य करता है। यह कला रूप व्यक्ति को मानसिक शान्ति, संतुलन और ध्यान की स्थिति में ले जाता है, जिससे शरीर, मन और भावना की त्रिवेणी सामंजस्यपूर्ण और सुमधुर बनती है और व्यक्ति जीवन के हर पहलू में अधिक संयमित, समर्पित और पूर्ण रूप से अपने कर्तव्यों का पालन करता है। नृत्य और संगीत, एक गहरी कला के रूप में, कलाकारों को अपनी अनन्त रचनात्मकता और भावनाओं की अभिव्यक्ति का एक अपरिमित मंच प्रदान करता है। यह न केवल एक कला रूप के रूप में विकसित होता है, बल्कि सम्वेदनाओं और रचनात्मकता के सम्प्रेषण का अनिवार्य रूप बनता है। नृत्य एवं संगीत सीखने के इच्छुक बच्चें एवं बच्चियों को नृत्य (कत्थक, भरतनाट्यम, फोक, एरोबिक्स इत्यादि) एवं संगीत (तबला, गिटार, इत्यादि) की शिक्षा दी जाती है। इस संस्था के माध्यम से बड़ा–बड़ा स्टेज पर प्रफॉर्म करने का अवसर भी मिलता है। इच्छुक छात्र–छात्राऍ संस्था कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं अथवा संस्था कार्यालय में आकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।











