Literacy Mission

  • साक्षरता मिशन – समाज में व्याप्त दरिद्रता एवं अव्यवस्था का मिथ्यारहित कारण निरक्षरता के जटिलतम तंतुओं में निहित है। निरक्षरता केवल एक भौतिक अभाव की स्थिति नहीं, अपितु यह मानसिक, बौद्धिक तथा सामाजिक स्तर पर भी व्यक्तित्व की मर्यादा को अभावग्रस्त करने वाली एक अव्यवस्थित स्थिति है। निरक्षरता के परिणामस्वरूप अंधविश्वास, धोखाधड़ी, लिंग भेदभाव एवं सामाजिक पिछड़ापन जैसे खतरनाक तत्वों का प्रबल पोषण होता है। इस महाप्रलयकारी अज्ञानता के कारण समाज के एक विशाल खंड को विकास के सम्भावित लाभ से वंचित रहना पड़ता है, जिसके फलस्वरूप यह एक आत्मविस्मृति की ओर अग्रसर होता है। निरक्षरता एक ऐसी सांस्कृतिक जड़ता उत्पन्न करती है, जो न केवल मानव मस्तिष्क की सृजनात्मकता एवं चिन्तनशीलता को निरस्त करती है, अपितु यह सामाजिक असमानताओं को भी विस्तारित करने का कार्य करती है। अज्ञानता के गर्त में डूबे हुए समाज के सदस्य प्रायः अपने ही अस्तित्व के लिए संकल्पविहीन हो जाते हैं और उनके भीतर गहरी निराशा तथा आत्महंता प्रवृत्तियों का जन्म होता है। ऐसे में, जब शिक्षा के स्तम्भ समाज के अभावग्रस्त अंश तक नहीं पहुँच पाते, तो विकास की प्रक्रिया विफल हो जाती है और सामाजिक सृजनात्मकता में ह्रास होने लगता है। इस प्रकार निरक्षरता, एक अत्यधिक जटिल और विकट समस्या है, जो समाज के शाश्वत विकास की दिशा में सबसे बड़ी बाधा बनकर उपस्थित होती है। साक्षरता मिशन, एक ऐसे उद्यम अथवा योजना का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य समाज के समस्त वर्गों में शिक्षा एवं साक्षरता के माध्यम से जागरूकता का प्रसार करना और मानव मस्तिष्क को लेखन, पठन – पाठन एवं बोधन की क्षमता प्रदान करना। यह मिशन विशेष रूप से उन व्यक्तियों को लक्षित करता है, जो किसी संयोगवश या असमर्थता के कारण शिक्षा से वंचित रह गए हैं। साक्षरता मिशन का प्रमुख उद्देश्य न केवल समाज में शिक्षा के महत्व को उद्घाटित करना है, अपितु इसका अन्तिम ध्येय यह है कि यह उन व्यक्तियों को उपयुक्त अवसर प्रदान कर सके, ताकि वे अपनी जीवन स्थितियों में परिवर्तन और सुधार की दिशा में अग्रसर हो सकें। भारत में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन (NLM) और इसके समकक्ष अनेक राज्यस्तरीय योजनाएँ इस महान कार्य की दिशा में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, ताकि प्रत्येक नागरिक को ज्ञान के दिव्य प्रकाश से आलोकित किया जा सके।संगठन द्वारा प्रस्तुत इस दिव्य कार्य के माध्यम से, अशिक्षित एवं अविकसित बालकों एवं बालिकाओं को सामाजिक और सांस्कृतिक धारा में समाहित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़कर जीवन के समुचित विकास की ओर अग्रसर हो सकें। आर्थिक रूप से अत्यन्त विपन्न परिस्थितियों में निवास करने वाले इन बालकों और बालिकाओं को शैक्षिक सामग्री की आपूर्ति की जाती है, जिससे उनका पठन-पाठन यथासंभव निरन्तर चल सके, जैसे कि एक विद्यालय में होता है। संगठन ने योग्य और अनुभवसंपन्न शिक्षकों के एक सशक्त दल की नियुक्ति की है, जो इन बालकों को सर्वोत्तम शिक्षा प्रदान करने हेतु पूर्ण रूप से समर्पित हैं। पठन-पाठन की प्रक्रिया के साथ-साथ इन बच्चों को नैतिक शिक्षा भी दी जाती है, ताकि वे केवल शैक्षिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक दृष्टि से भी सशक्त और उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें। समय-समय पर इन बच्चों के बीच प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि उनका शिक्षा के प्रति उत्साह निरन्तर बना रहे और वे समाज में अपने योगदान के लिए प्रेरित हों। जो भी व्यक्ति इस पुण्य कार्य में सम्मिलित होना चाहते हैं, वे संस्था से सम्पर्क कर सकते हैं और संस्था कार्यालय में उपस्थित होकर इस महान उद्देश्य के प्रति अपनी योगदान की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस संस्था के कार्य में सहभागी बनकर वे न केवल समाज के वंचित वर्ग के बच्चों के जीवन में बदलाव ला सकते हैं, बल्कि मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह भी कर सकते हैं।